मेरी कलम से !!

कहते हैं जो गिरने से डरा नहीं करते, अक्सर वही आसमान को छु लिया करते हैं.........

15 Posts

361 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 13885 postid : 24

हाय ये तड़पन

Posted On: 12 Apr, 2013 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

दिल में पहले कभी इतना जलन ना था।
किसी से पहले इतना अपनापन ना था।
जी उठे खामोश गलियां जिन पैरो की अहाटो से,
उन पायलो में पहले इनता छन-२ ना था।………..1
.
तस्ब्वुर भी, जब जन्नत सी लगे।
पुकार-तड़पन भी, जब मन्नत सी लगे।
उस पल अखरती है उसकी जुदाई,
और उसको पाने का कोई जतन ना था।
.
जुदाई का अब तो मज़ा आ रहा।
एक-२ पल दिल ज्यादा उसे चाह रहा।
हैं भरोसा अब इस खुदी से भी ज्यादा,
वो सचे वफ़ा हैं, कोई छलन ना था।
.
वो आने को बेकल, दिल पाने को बेकल।
चरागे गुलशन जलाने को बेकल।
हम चुरा ही लेते उसको उसकी दुनिया से,
पर ये मेरे घर का चलन ना था।
.
उसके नाम के सिवा मेरी लिए कोई कथन ना था।

उसके चहरे के सिवा और कोई दर्पण ना था।

यू तो उसको उसकी खुदी से कब का चुरा लेते,

पर ये मेरी मोहब्बत का चलन ना था।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
16/04/2013

जुदाई का अब तो मज़ा आ रहा। एक-२ पल दिल ज्यादा उसे चाह रहा। हैं भरोसा अब इस खुदी से भी ज्यादा, वो सचे वफ़ा हैं, कोई छलन ना था। . वो आने को बेकल, दिल पाने को बेकल। चरागे गुलशन जलाने को बेकल। हम चुरा ही लेते उसको उसकी दुनिया से, पर ये मेरे घर का चलन ना था। .बहुत खूब ! सुन्दर अल्फाज़

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    16/04/2013

    योगी जी आपका तहे दिल से धन्यवाद…….


topic of the week



latest from jagran