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हिन्दी समान्न्जनक भाषा पहले भी थी, अब भी हैं, और आगे भी रहेगी... "Contest"

Posted On: 15 Sep, 2013 Contest में

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क्या हिंदी सम्मानजनक भाषा के रूप में मुख्य धारा में लाई जा सकती है? अगर हां, तो किस प्रकार? अगर नहीं, तो क्यों नहीं?

हिन्दी समान्न्जनक भाषा पहले भी थी अब भी हैं और आगे भी रहेगी, अगर बात करें क्या हिन्दी-भाषा  मुख्य धारा मे लाई जा सकती है? तो अभी तक के अनुभव से यही सीख मिलती हैं की हिन्दी-भाषा को मुख्य धारा मे लाना आज के संदर्भ मे असंभव सा लग रहा हैं जब भाषा बोलने मे शर्म आने लगे तब उसपर कुछ भी टिप्पड़ी करना भाषा की बेज्जती करना होगा। हाँ ये मैं जरूर कहूँगा की समय समय पर भाषा को प्रोत्शाहन  देने हेतु प्रतियोगिताएं व  आंदोलन भी होते रहे  हैं। अगर आज से संदर्भ मे देखे तो हिन्दी ब्लॉगिंग बहुत ही चर्चित विषय बन गया हैं, पूर्ण हिन्दी मे वार्ता, सूचनाओ का आदान प्रदान व प्रतिकृया पूर्णा रूप से हिन्दी मे होने लगी हैं बल्कि अब तो सोसियल साइट भी हिन्दी-भाषा को बढ़ावा दे रहे हैं, गाँव-2 मे इंटरनेट की व्यवस्था भी हो रही हैं, ई-चौपाल इसका मुख्य उदाहरण हैं जिसके जरिये हम  किसान भाइयो की बात को सुन सकते हैं। इंटरनेट के जरिये हम किसी भी भाषा को अपनी मात्र-भाषा मे बदल कर पढ़ भी सकते हैं, काफी कुछ बदलाओ आया हैं, परंतु इसका मतलब ये नहीं है की हिन्दी-भाषा मुख्य धारा मे बहने के लिए तैयार खड़ी हैं, मेरी समझ से ये सिर्फ हिन्दी को प्रोत्शाहन देना मात्र हैं।

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अगर मुख्य धारा की बात करे तो मेरी समझ से पूर्ण रूप से उसी भाषा का उपयोग हो, चाहे वो पढ़ाई के क्षेत्र मे हो, व्यवसाय के क्षेत्र मे हो, नौकरी पाने के लिए हो या अन्य। जैसा की चीन और जापान मे होता हैं…………..

सन 1991 मे औद्योगिक नीति का आगमन  तथा 1992 मे SEBI के बाद हिंदुस्तान मे पूर्णा रूप से सभी व्यवसाय अँग्रेजी-भाषा मे होने लगे, आज देश मे लगभग लाखो इंजीनियर, एमबीए, एमसीए, एमएससी, पीडीएच, डॉक्टर, सीए  इत्यादि अपनी शिक्षा अँग्रेजी-भाषा मे प्राप्त करते हैं, लाखो लोग प्रति वर्ष नौकरी के लिए प्रस्तावित होते हैं जिनका साक्षात्कार और कार्य अँग्रेजी-भाषा माध्यम से करते  हैं। अगर हिन्दी-भाषा को मुख्य धारा मे लाने के लिए सोचे तो सबसे पहले हिंदुस्तान मे हिन्दी माध्यम से शिक्षा होनी चाहिए, फिर व्यापार पूर्ण रूप से हिन्दी माध्यम से होना चाहिए, और फिर नौकरी मे साक्षात्कार और उनके कार्य पूर्ण रूप से हिन्दी-भाषा मे होने चाहिए, इसका मतलब हिंदुस्तान को एक नए सिस्टम की शुरवात, नए स्तर से करनी होगी……. कुछ सवाल मैं पूछना चाहूँगा सभी पाठको से

  1. क्या ये संभव हैं ????
  2. हिंदुस्तान मे 1000 से ज्यादा कंपनिया विदेशी हैं क्या वो हिन्दी-भाषा मे कार्य कर पाएँगी ????
  3. क्या जो बच्चे विदेश से पढ़ने आते हैं वो हिन्दी-भाषा मे पढ़ाई कर सकेंगे?? अगर नहीं? तो क्या उनके लिए उनकी भाषा मे पढ़ाई का मध्यम बनाना होगा???
  4. आज हिंदुस्तान मे एक बलात्कारी को सज़ा मिलने मे 9 महिना लग जाता हैं, वहाँ क्या ऐसे नए सिस्टम की उम्मीद की जा सकती हैं ????
  5. क्या नई पीढ़ी इस माध्यम को स्वीकार कर पाएगी???

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अग्रेज़ी-भाषा ने तो आज़ादी से पहले ही अपना दबदबा बना लिया था, उसी समय जिसको अँग्रेजी आती थी वो अच्छी नौकरी अंग्रेज़ो के काफिलो मे पा जाया करता था, उस समय भी वही बात थी की अच्छी आय का स्रोत केवल अग्रेज़ी-भाषा से मिलता हैं और आज भी वही युग है की अगर अँग्रेजी-भाषा आती हैं तो आप पैसे कमा सकते हैं। नहीं तो हिन्दी-भाषा मे तो भिखारी भी भीख मांगता हैं…. माफ करिएगा मैं भाषा का अपमान नहीं कर रहा हूँ, बस जो सच है वो कह करा हूँ। क्योकि हिन्दी-भाषा से अपने ही देश मे कोई आय का स्रोत का माध्यम नहीं दिया गया  हैं तो हम क्या करें। भीख मांगे या अंगेजी शीखे??

हिन्दी प्रोतशाहन हेतु एक कविता लिखी हैं, उम्मीद हैं “हम होंगे कामयाब एक दिन”

माँ की लोरी मे हूँ।

दूध की कटोरी मे हूँ।

पहले चले कदम मे हूँ।

पैजनियों की छमछम मे हूँ।

विध्यालय की पहली कक्षा मे हूँ।

परीक्षा फल की प्रतीक्षा मे हूँ।

खेल कूद हर उमंग मे हूँ।

प्यार करने वालों के संग मे हूँ।

शादी मे सज़े, हर रंगोली मे हूँ।

संग जो जा रही दुल्हन, उसकी डोली मे हूँ।

कामयाबी के हर चरण मे हूँ ।

जिंदगी से मिले हर स्मरण मे हूँ।

तेरे नए घर की, हर ईंटों मे हूँ।

तेरी हर हार, और जीतो मे हूँ।

तेरी बुढ़ापे की लाठी मे हूँ।

तेरी कंधो की झुकी, काठी मे हूँ।

तेरी काँपती उंगली मे हूँ।

मोह माया से दूर, तेरे दिल मे हूँ।

मरने पे तेरे मुह से निकले, उस राम मे हूँ।

तिथ्थि पे लिटाकर तुझे देते, आखिरी सलाम मे हूँ।

जलती तेरी उस चिता मे हूँ।

तेरे शोक मे निकले, हर आह मे हूँ।

तेरी तेरवी मे किए हर रीति रिवाज मे हूँ।

मैं कल भी थी, मैं आज भी हूँ।

मैं हिन्दी हूँ तेरी माँ !!!!!

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94 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ram kumar के द्वारा
03/10/2013

ये बात सही है की हिंदी भी आज सम्मान जनक भाषा है

Soni verma के द्वारा
30/09/2013

अभिलेख अच्छा लिखा है

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    03/10/2013

    सोनी जी हार्दिक धन्य्वास

suresh3 के द्वारा
28/09/2013

हिंदी के प्रति आपकी समझ अच्छी है आपका लेख अच्छा लगा

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    03/10/2013

    सुरेश जी धन्यवाद

Pradeep Kashyap के द्वारा
26/09/2013

बहूत खूब लेखन… कविता की पंक्तियाँ बहुत ही अच्छी है आभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    28/09/2013

    प्रदीप जी पेज पर आने, लेखन को पढ़ने तथा अपनी प्रोत्सहन तथा मनोबल बढाती प्रतिकृया देने हेतु हार्दिक धन्यवाद

Asha srivastava के द्वारा
26/09/2013

अपने बहुत सही विवेचना की है आभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    28/09/2013

    आशा जी पेज पर आने, लेखन को पढ़ने तथा अपनी प्रतिकृया देने हेतु हार्दिक धन्यवाद

ram kumar के द्वारा
26/09/2013

हिंदी का बारे में लेख अच्छा है

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    28/09/2013

    राम कुमार जी पेज पर आने, लेखन को पढ़ने तथा अपनी प्रतिकृया देने हेतु हार्दिक धन्यवाद

Jaya Tiwari के द्वारा
26/09/2013

बहुत खूब विश्लेषण किया आपने, कविता मनो मन में उतर गई आभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    28/09/2013

    जाया जी पेज पर आने, लेखन को पढ़ने तथा अपनी प्रोत्शाहन करती प्रतिकृया देने हेतु हार्दिक धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
25/09/2013

प्रदीप जी बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति है. कविता बहुत अंतर्मन से लिखी हुई है. साभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    28/09/2013

    यमुना पाठक जी, पेज पर आने, लेखन को पढ़ने तथा अपनी प्रोत्शाहन मय प्रतिकृया देने हेतु हार्दिक धन्यवाद

Sunil pal के द्वारा
25/09/2013

हिंदी के बारे में आपकी सोच acchi hai

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    28/09/2013

    सुनील जी पेज पर आने, लेखन को पढ़ने तथा अपनी सुन्दर प्रतिकृया देने हेतु हार्दिक धन्यवाद

vinod kumar के द्वारा
25/09/2013

आपका लेख अच्छा है ये तो है की हिंदी सम्मान जनक भाषा है और आगे भी रहेगी

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    28/09/2013

    जी बिलकुल विनोद जी पेज पर आने, लेखन को पढ़ने तथा अपनी प्रतिकृया देने हेतु हार्दिक धन्यवाद

24/09/2013

बहुत खूब. मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ. जब तक हिंदी को रोजी-रोटी से सीधे नहीं जोड़ा जायेगा, तब तक उसे उचित सम्मान नहीं मिलेगा. 

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    24/09/2013

    जी बिलकुल सही कह रहे है आप लेख पढ़ने और प्रोत्शाहन के धन्यवाद्

Raj Bahadur के द्वारा
23/09/2013

बिलकुल सही कहा आपने… आभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    24/09/2013

    राज बहादुर जी लेख पढ़ने और प्रोत्शाहन के धन्यवाद्

vikash pathak के द्वारा
23/09/2013

है हिंदी को मुख्य धारा में लाना चहिय….

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    24/09/2013

    विकाश जी लेख पढ़ने और प्रोत्शाहन के धन्यवाद्

neena के द्वारा
23/09/2013

बहुत भाव पूर्ण कविता .बधाई

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    जी धन्यवाद….

Shudha Bajpai के द्वारा
23/09/2013

हिंदी भाषा को मुख्य धारा में नहीं ला सकते ये तो सही है

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    शुधा जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया हेतु प्रोत्शाहन देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

prateek56 के द्वारा
23/09/2013

आपका लेख अच्छा लगा

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    प्रतीक जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया हेतु प्रोत्शाहन देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Richa Rajpoot के द्वारा
22/09/2013

बहुत सही लिखा आपने आभार

Richa Rajpoot के द्वारा
22/09/2013

बहुत खूब लिखा आपने… पढ़कर अच्चा लगा आभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

     ऋचा जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया हेतु प्रोत्शाहन देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Neha Kushwaha के द्वारा
22/09/2013

ये सही है की हिंदी का शोषण तो आज़ादी से पहले से शुरू हो गया था, आपने सचाई को लिखने की अच्छी कोसिस की हैं शुभकामनाये..

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    जी बिलकुल सही कहा अपने… नेहा जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया हेतु प्रोत्शाहन देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Anand Bhusan के द्वारा
22/09/2013

बहुत सही अगर हिंदी भाषा को मुख्या धारा में लाना है तो हिंदुस्तान को एक नहीं शुरुवात की जरुरत होगी, क्योकि लेखा कार्य हो, या फिर बोलचाल जहा पर भी प्रोफेसनल की बात करे वो अंग्रेजी क्यों ज्यादा अहमियत देने लगे हैं…. आभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    जी बिलकुल सही कहा अपने… आनन्द जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया हेतु प्रोत्शाहन देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Santosh Varma के द्वारा
21/09/2013

प्रदीप जी, काफी अच्चा अभिलेख पढ़कर अच्चा लगा आभार…..और सच में अभी तो एक नया युग गढ़ना हैं…शुभकामनाये

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    बिलकुल संतोष जी, लेख पढ़ने व प्रतिकृया हेतु प्रोत्शाहन देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Sonam Varma के द्वारा
21/09/2013

सुन्दर व सटीक लिखा अपने…. आभार …

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    सोनम जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया हेतु प्रोत्शाहन देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Veer Pal के द्वारा
21/09/2013

चलो किसी को हिंदी की चिंता है ये जानकर खुश हुआ कम से कम कोई तो हिंदी के बारे मैं सोचता है कोशिश जारी रखो देखो कम तक हिंदी मुख्य धारा में आती है धन्यबाद

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    जी बिलकुल धन्यवाद्

Kaushal Soni के द्वारा
21/09/2013

मैं आपकी बात से सहमत हु .

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    जी धन्यवाद्

Gitanjali Verma के द्वारा
21/09/2013

आज के युग में हिंदी भाषा को मुख्य धारा में नहीं ला सकते ये तो सही है \

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    गीतांजलि जी हार्दिक धन्यवाद्

priyanka shrama के द्वारा
20/09/2013

मैं हिंदुस्तान मे रहती हु और हिंदी बोलती हु मुश्जे गर्व है की हम हिंदुस्तानी है और हिंदी हमारी मार्त्य भाषा है आपका लेख अच्छा है

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    जी बिलकुल सही कहा अपने… प्रियंका जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया हेतु प्रोत्शाहन देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

ashutosh pandey के द्वारा
20/09/2013

ये तो लोगो पर निभर करता है की वो हिंदी अपनाते है या फिर अंग्रेजी पर जहा तक देखा जाये तो हिंदी को अब लोग जायदा नहीं बोलते अगर आम बोल चाल ना हो तो ………

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    जी बिलकुल सही कहा अपने… आशुतोष जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया के लिए हार्दिक धन्यवाद

prakash jaiswal के द्वारा
20/09/2013

हिंदी तो आज भी आगे है प्रदीप पर लोगो ने अंग्रेजी के चक्कर में हिंदी को छोड़ दिए इसी वजह से आज हिंदी पीछे है ….

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    23/09/2013

    जी बिलकुल सही कहा अपने… लेख पढ़ने व प्रतिकृया के लिए हार्दिक धन्यवाद

ra786 के द्वारा
19/09/2013

हिंदी तो सम्मान जनक भाषा है किन्तु आज के युग में हिंदी को जायदा महत्व नहीं दिया जाता है लोग इंग्लिश की ओर आगे बढ़ रहे है तो कौन हिंदी को याद करेगा

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    सही कहा आपने पेज पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

gupta4 के द्वारा
19/09/2013

आपका अभिलेख पसंद आया इसके बारे में जायदा नहीं कहुगा धन्यबाद ………..

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

     जी पेग पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Pooja Kashyap के द्वारा
19/09/2013

प्रदीप जी, बिलकुल सही कहा आपने, अगर हिंदी को मुख्या धारा में लाना हैं तो हमें तुरंत नयी शुरुवात करनी होगी, जो की आज के सन्दर्भ में मुमकिन नही हैं, कविता की हर पंक्तिया बहुत खूबसूरत हैं, बधाई ..

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    पूजा जी पेज पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Neel Varma के द्वारा
19/09/2013

बिलकुल सही कह रहे है आप… अग्रेज़ी की दबदबा तो पहले से था, सायद यही कारन हैं, जिसकी वजह से धारा में लाना नामुमकिन सा लग रहा हैं… सुन्दर कविता आभार …

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    जी बिलकुल नील जी पेज पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

abhi123 के द्वारा
19/09/2013

आपका अभिलेख अच्छा लगा

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    जी पेग पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Pooja Chauhan के द्वारा
18/09/2013

प्रदीप जी, हिंदी भाषा की प्रतिभा ही जब छुपा कर रख दी गई हैं उन पुराने दराजों में तो क्या बोलू, अब तो हार्ड-डिस्क का ज़माना आ गया, बहुत सुन्दर अभिलेख, और सुन्दर पंक्तियाँ शुभकामनाये….

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    पूजा जी नयी तकनिकी भी काफी हद तक दोषी है, हिंदी भाषा को डुबाने में …..पेग पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

ravi78 के द्वारा
18/09/2013

आपने जो लिखा है वो अच्छा है और साथ मैं कविता लिख दिए अच्छा लगा ……….. आभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    रवि जी पेग पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Ram Sagar के द्वारा
18/09/2013

बिलकुल सही कहा आपने, आज दी डेट में हिंदुस्तान एक नयी शुरुवात करने के स्थिति में नही हैं…. विचारनीय लेख आभार…

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    राम सागर जी पेज पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Keshar Singh के द्वारा
18/09/2013

भाई प्रदीप जी, आपने जिस तरह से साडी बातो को समझाने की कोसिस की है, उम्दा कोसिस है, और जिस तरह से आपने अपने कविता के जरिये मानव जीवन में हिंदी के महत्व की बात की हैं बेहद खूबसूरत हैं….

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    केशर जी पेज पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

rajeev15 के द्वारा
17/09/2013

आपका विचार ठीक है

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    राजीव  जी पेग पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

vijay786 के द्वारा
17/09/2013

हा ये सच है जो उल्लेख अपने ने दिया है ये तो आज कल की कार्य में जायदा हिंदी इस्तमाल करना ठीक नही है

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    विजय  जी पेग पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Minakshi Singh के द्वारा
17/09/2013

बहुत खूब अभिलेख, जिस तरह आपने सारी बातो को साफ़ करते हुए ये बताया की हिंदुस्तान अभी इस स्थति में नही है की वो नयी प्रणाली की निर्माण कर सके.. और आपके किसी भी प्रसन का जवाब अगर होता तो जरुर हिंदी भाषा मुख्या धारा में आ जाती… कविता के लिए जरुर प्रसंसा करुँगी… आभार,.!!!!

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    जी मीनाक्षी जी सही कहा आपने अगर एक भी सवाल हल हो जाये तो बहुत कुछ बदला जा सकता है पेग पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Dipali के द्वारा
16/09/2013

सवाल का जवाब तो नही हैं, और ये सही भी अगर आज की हालत देखि जाये तो…प्रदीप जी आज कल तो ऐसा हो गया है की सिर्फ गरीब परिवार चाहे जितना भी गरीब हो, लेकिन अपने बच्चो को अंग्रेजी तालीम देने से पीछे नही हटता विचारणीय लेख,… और कविता में जो आपने मानव जीवन में हिंदी की उपस्त्थी की विवेचना की हैं बहुत ही सहरहनिय हैं बधाई

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    दीपाली जी पेग पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

Rupa Jaiswal के द्वारा
16/09/2013

प्रदीप जी, बहुत सही लिखा आपने…और जो पुरे जीवन में हिंदी का उपयोग करते है हम उसपर आपकी कविता सराहनीय हैं …. बधाई

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    जी धन्यवाद

Rupa Jaiswal के द्वारा
16/09/2013

प्रदीप जी, बिलकुल सही कहा आपने, अगर हिंदी को मुख्या धरा में लाना है हिंदुस्तान को एक नही शुरुवात करनी है और आज परिपेक्ष में यह संभव नही …. सुन्दर कविता … आभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    रूपा  जी पेग पर आने के लिए और लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

seemakanwal के द्वारा
16/09/2013

बहुत खूब लिखा .आभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    सीमा जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए धन्यवाद

Guljar Ahamad के द्वारा
16/09/2013

भाई प्रदीप जी इन सवालो में से कोई भी सवाल नही हैं जिनका जवाब आज के समय में दिया जा सकता हैं …. हा ये जरुर कहूँगा की मुख्या धारा में लाना आज के परिवेश में न मुमकिन सा हैं, हा बस हम हिंदी को बढ़ावा दे सकते है की वो फले फुले और हर जगह बोली जाये…. सुन्दर कविता आभार ….

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    बिलकुल सही कहा गुलजार जी अपने…. हिन्दी ब्लॉग भी हिन्दी भाषा को बढ़ावा देने मे भी काफी सहयोग कर रहा हैं…….. लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए धन्यवाद

Ram Siingh के द्वारा
16/09/2013

भाई प्रदीप जी ये तो हैं हिंदुस्तान एक नए सुरुवात करने के हालत में नही हैं, और न झूठे ख्वाब देखे की वो एक नए सिस्टम को बना सकता हैं….. कविता में आपने एक इन्सान के जीवन में कहा तक भागीदार हैं हिंदी बड़ी ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया… विचारणीय अभिलेख …..आभार

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    बिलकुल सही कहा आपने ॥ राम सिंह जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए धन्यवाद…..

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
15/09/2013

सुन्दर व् सटीक .बधाई

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    डॉ। शिखा जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए धन्यवाद

ushataneja के द्वारा
15/09/2013

अति सराहनीय लेख! बधाई हो!

    Pradeep Kesarwani के द्वारा
    20/09/2013

    उषा जी लेख पढ़ने व प्रतिकृया देने के लिए धन्यवाद


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